Sunday, January 19, 2020

sabab ishq ka jano magar , deewane ka haal zarur puchho

परिंदो को ता उम्र दरख़्त से मुहब्बत थी 
हमें लगा बाग़ में दाने को आते हैं 

शहर का धुंआ घोटने से अच्छा था ,
गाँव की धुल फांकता 
ख्याल बना रहता है , हम कारखाने को जाते हैं 

अब और खत में कितनी जान डाल पाता मैं 
जाने दिया उन्हें , जो जाने को आते हैं 
          
                                               विपुल 



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