हमने तोहफे में घडी क्या दे दी
वक्त जाने की उन्हें आदत लग गयी
तरस खाकर घर में पनाह दी थी
किरायदारों को छत की आदत लग गयी
कभी घर जाने का इंतज़ार हम भी करते थे
न जाने कब पेट पालने की आदत लग गयी
तेरी औकात से वाकिफ़ थे , फिर भी गुलाब दिया
अफ़सोस ! तुम्हे तलवार रखने की आदत लग गयी
ये सच है कि तुमसे बिछड़कर हमने रातों अचकनें भिगोई हैं
बेजान हो गए थे , न जाने कब चिल्लम की आदत लग गयी
विपुल
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