Sunday, January 19, 2020

आखिर आदत लग गई

हमने तोहफे में घडी क्या दे दी 
वक्त जाने की उन्हें आदत लग गयी 

तरस खाकर घर में पनाह दी थी 
किरायदारों को छत की आदत लग गयी 

 कभी घर जाने का इंतज़ार हम भी करते थे
न जाने कब  पेट पालने की आदत लग गयी  

तेरी  औकात से वाकिफ़ थे , फिर भी गुलाब दिया 
अफ़सोस ! तुम्हे तलवार रखने की आदत लग गयी 

ये सच है कि  तुमसे बिछड़कर हमने रातों अचकनें भिगोई हैं 
बेजान हो गए थे , न जाने कब चिल्लम की आदत लग गयी 
                                  
                                                                 विपुल 


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