हे! महामायावी मोदीजी आपसे यथासंभव विनम्रता के साथ , हाथ जोड़कर अपने कंकड़ कंकड़ को आपके चरणों मे समर्पित करके एक निवेदन करती हूँ कि मेरे गाँव के किसान को जितनी जल्दी हो सके वापस भेज दो । जबसे वह गया है रात दिन डर के साए में गुज़रते हैं कि कहीं तुम्हारी लुटियों , माफ़ कीजिये लुट्येन्स की दिल्ली में काम कर रहे गार्ड की नौकरी उसे पसंद न आ जाए । अगर ऐसा हो गया तो मुझे कौन अपने फावड़े से गुद-गुदएगा , कौन मेरी प्यास पर अपने आँसू बहाएगा ? बताओ न कौन जाएगा नंगे पाँव बाज़ार तक और मुन्ने की मिठाई का पैसा मेरी ख़ुराक पर लुटाएगा , बताओ न किसके बच्चे मेरी गोद में खेल कर सच में मुझे माँ होने का एहसास दिलाएंगे ?
मैं जानती हूँ मैंने आज फर्टिलाइज़र की लत लगा ली है और मैं उसे खाने भर भी फसल ऊगा कर नहीं दे सकती तो मुनाफ़ा तो सपना ही ठहरा । मगर क्या करूँ आज अपनी हरियाली पर गर्व नहीं डर होता है कि कहीं यह पौधे बड़े पेड़ न बन जाएं जिन्हें देख उसे फाँसी का ख्याल आ जाता है और इसी तरह मैं अपने सारे बच्चों को खो दूँ।
बहुत भोला है वो । उसे ख़ुद के लिए कुछ नहीं चाहिए बस वो तो चाहता है कि उसके मुन्ने , उसकी मुन्नी का बस्ता किताबों के बग़ैर हल्का न हो जाए , जो बची हुई नथिनी से उसकी मेहरारु उसके अंदर रति जगाती है , कहीं उसे भी सहकारी बैंक वाले छीन कर न ले जाएं ।कहीं उसकी गाय भी भूख के मारे दम न तोड़ दे और गौ हत्या के पाप से अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति को वह उथल पुथल न कर दे । इसके बाप परदादाओं को बरसों से देखते आ रहीं हूँ , यह परिवार हमेशा से गरीबी में जीता आ रहा है , क्या अब भी इसके दिन नहीं बदलेंगे ? भगवान की लाज रखना और यह बिल्कुल मत कहना कि इसे अपनी गरीबी दूर करने के लिए संसद में बैठना पड़ेगा । गाँव का आदमी है न ! इसीलिए इसे मंदिर में कीर्तन देखने की आदत है , हंगामा नहीं । ना बाबा ना मैं तो इस चीज़ के लिए कभी राज़ी नहीं होउंगी । क्या पता ? कल को ये भी तुम्हारी तरह सालों पंखेदार विमानों में घूम कर आकाश की सैर करे और चुनाव आने पर कहे कि मुझे तो मेरी माँ , मेरी ज़मीन ने बुलाया है ।
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