Wednesday, March 18, 2020

आशिक़ हूँ , मांग कर देख

न  चाँद की चूड़ी , न रात का काजल , न झूठे ख्वाब दूंगा 
आशिक़ हूँ , मांग कर देख , मुहब्बत बेहिसाब दूंगा 


न वो रेशमी लिबास , न बरेली का झुमका , न शायराना जवाब दूंगा 
आशिक़ हूँ , मांग कर देख , मुहब्बत बेहिसाब दूंगा 


न हीरों का हार , न केसर की लाली , न पीने को नशीली शराब दूंगा 
आशिक़ हूँ , मांग कर देख ,मुहब्बत बेहिसाब दूंगा 


न कालीन बिछी ज़मीं , न चमचमाती दीवारें , न काटों से बचने वाली जुराब दूंगा 
आशिक़ हूँ , मांग कर देख , मुहब्बत बेहिसाब दूंगा 


न कन्नौज का इत्र , न बनारस का पान , न बालों में लगाने को गुलाब दूंगा 
आशिक़ हूँ , मांग कर देख  , मुहब्बत बेहिसाब दूंगा 


न सोने की कर्धन , न राज सिंघासन , न मशहूर करने वाला खिताब दूंगा 
आशिक़ हूँ , मांग कर देख , मुहब्बत बेहिसाब दूंगा 





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Ghazal

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