वो घाव जिन्हें सूखने का हक़ नहीं
जिनके लिए बेईमानी है मरहम वो घाव जिन पर जाते ही घिनना जाती हैं
आपकी नज़रें
उन सारे घाव की दवा करना चाहता हूँ
माफ़ कीजिये मैं गुनाह करना चाहता हूँ
जो दिखाया गया था नींद का सपना
जिस उम्मीद पर आँधी और तूफ़ानों को
पार कर आये हैं इतने लोग
क्या बड़ा मांगते हैं आपसे
मौत से पहले , सुकून से
आँखें बंद करने की इजाज़त ?
हमारी नींद को आप यही नाम देंगे
तो ठीक है , मैं नशा करना चाहता हूँ
माफ़ी हुज़ूर , मैं गुनाह करना चाहता हूँ
मुझे मालूम होता कि
कानून की किताबें
बस दफ़्तर की अलमारियों की हैं
तो क्यों पढ़ता उन्हें
और अब उनका हवाला देकर
ग़ैर अख़लाक़ी को दूना करना चाहता हूँ
माफ़ी मालिक ! मैं गुनाह करना चाहता हूँ
जो हड्डियां भट्टों में जल चुकी हैं
जो जबड़े अपना काम भूल चुके हैं
उन्हें आपकी रहम याद दिलाने वास्ते
कुछ रोटी के टुकड़े अता करना चाहता हूँ
आपकी इजाज़त हो तो अपनी मर्ज़ी से
एक छोटा सा गुनाह करना चाहता हूँ
जिन लाशों से आपको बू आती है
जिनके मुँह से निकल रही है चीटियों की कतार
जिनपर बेकरार हैं कौवे
उन्हें फेंकने से पहले
उनपर रोने वाले परिवार का पता करना चाहता हूँ
बस ज़रा सा वक़्त दीजिये
मैं जल्द से जल्द गुनाह करना चाहता हूँ
फिर चाहे ढक दीजियेगा कानूनी दफाओं से
और चबा-चबा कर पढ़ियेगा अदालत में
मेरी इस हिमाक़त की सज़ा
मेरी मुट्ठी से छीन कर , आपने मुझे नमक दिया था
मैं उसका भी हक़ अदा करना चाहता हूँ
मगर उससे पहले
बड़े हक़ से , मैं गुनाह करना चाहता हूँ
'विपुल'
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