आखिर वो कौन था , जो तुमसे मिलकर हारा नहीं,
काफी है सूखी रोटी पेट को, नमक बगैर जखम का गुज़ारा नहीं।
उसने बड़ी शिद्दत से लौटाया इश्क, बड़ी शिद्दत से वफ़ा अदा की,
मगर जिसका माथा चूमा गया, अफ़सोस वो हमारा नहीं।
समंदर निहारने से ज़्यादा आनंद है डूब जाने में,
ज़िंदगी सीखने मिलेगी लहरों से, सीखाता कुछ भी किनारा नहीं।
मौत देकर तड़पते देखने का सुकून छोड़ते भी तुम कैसे,
तुमने कोई जान नहीं बचाई, बस हमें जान से मारा नहीं।
मुहब्बत का हुनर सीखने का, जुटाएं कैसे हौंसला,
जो मुहब्बत लुटा रहा है, वो मुहब्बत कमा रहा नहीं।
तुम्हारे दुपट्टे से गुज़रती है थोड़ी एक्स्ट्रा ऑक्सीजन,
तुम पर लुट जाने के आलावा, था कोई और चारा नहीं।
बार-बार उन्ही हाथों से जाम पाकर थक गए थे,
सो साकी जा रहा था, और हमने कभी पुकारा नहीं।